कविता को सिर्सक “छ – छैन” – Jovial (कल्याण )

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यँहा देख्दा सवै थोक छ,

वुझ्दा धेरै थोक छैन…
कसैको कोही छ,
कसैको कोहीपनि छैन…

यो छ ,
त्यो छैन…
त्यो छ,
यो छैन…

चंगा छ,
लट्टा छैन…
नाता छ,
सत्कार छैन…

दश औँला छ,
नमस्कार छैन…
समबन्ध छ,
आत्मियता छैन…

रगत छ
शुद्ध छैन…
मन छ,
निरोगी तन छैन…

वाईक छ,
पेट्रोल छैन…
प्रेम छ,
प्रेमको मिठो भाका छैन…

I-phone छ,
सदुपयोग छैन…
महल छ,
शान्ती छैन…

भुकम्प छ,
पिल्लर दर्हो छैन…
उसँग कुरा धेरै छ,
सोध्छ यँहा WiFi छैन?

वोली छ,
रस छैन…
समाज मौरी झै व्यस्त छ,
मह उत्पादन छैन…

भविष्य अन्धकार छ,
वत्तीहरु वाल्ने कोशिस छैन…
आफन्त छ,
अाफ्नो छैन…

जितलाई जय-जयकार छ,
हारलाई स्वीकार छैन…
संगीतहरुको गुन्जन छ,
मिठास छैन…

A,B,C जस्तो सरल जीवन छ,
कसैलाई चाल छैन…
गणितका कठिन हिसाव छ,
समिकरण छैन…

सुंगुरको जस्तो मोटाई छ,
तागत छैन…
मृत्यु निश्चित छ,
समाधि शान्त छैन…

I-generationको रवाफ छ,
म(I) को हु भन्ने नी थाहा छैन…
यती लामो कविता छ,
कविताको अर्थ छैन…

#Jovial (कल्याण )

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One Thought to “कविता को सिर्सक “छ – छैन” – Jovial (कल्याण )”

  1. Modnath paudyal

    Inspiring,

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